सिटी पैलेस में आयोजित ‘अर्ली एड एशिया 2019‘ में शामिल हुए देश-विदेश के 600 से अधिक एजुकेटर्स

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जयपुर। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के मुद्दों पर आधारित एशिया की सबसे बड़ी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘अर्ली एड एशिया 2019‘ की आज सिटी पैलेस में शुरूआत हुई। दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के 600 से अधिक एजुकेटर्स और लगभग 40 वक्ता भाग ले रहे हैं। यह कॉन्फ्रेंस स्कून्यूज, अर्ली चाइल्डहुड एसोसिएशन (ईसीए) और महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा आयोजित की जा रही है। इसमें देश-विदेश के शिक्षाविद, प्रेक्टिशनर्स और नीति निर्माता शामिल हो रहें हैं।

ईसीए, भारत की प्रेसीडेंट, डॉ. स्वाति पोपट वत्स ने कहा कि वर्तमान में हमें दुनिया भर से बच्चों की मॉर्डन प्रारंभिक शिक्षा को जानने अथवा अपनाने के स्थान पर हमारी संस्कृति एवं नायकों को पुनः रिवाईव करने की आवश्यकता है। किसी भी बच्चे के सम्पूर्ण विकास में पुरुष एवं महिला शिक्षकों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है।

सीखने में भावनाओं के महत्व पर जानकारी देते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ पडुआ, इटली के प्रोफेसर, डॉ. डैनियल लुकानंजेली ने कहा कि टीचिंग से बच्चों में इमोशन, क्यूरीयोसिटी एवं लर्निंग की भावना जागृत होती है। बच्चे के दिमाग को शिक्षित करने में ‘सेन्सस‘ का योगदान अहम होता है। सकारात्मक भावनाएं बच्चे को दी गई सीख को लम्बे समय तक याद रखने में मदद करती है।

इसके पश्चात् नेशनल एजुकेशन कमेटी एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा गिजुभाई बधेका को समर्पित करते हुए ‘वंस अपॉन अ स्टोरी‘; प्ले पॉलिसी एवं स्कून्यूज के फरवरी माह के अंक ‘ऑवर चिल्ड्रन, ऑवर फ्यूचर‘ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर ईसीए एवं कैम्ब्रिज के टाई-अप ‘ पार्ट्नरिंग टू अनलॉक द पोटेंशियल ऑफ अर्ली लर्नर्स‘ भी लॉन्च किया गया।

पैनल डिस्कशन – ‘ मेकिंग टीचर्स योर बिगेस्ट इनवेस्टमेंट’

शिक्षकों द्वारा स्वयं को बेहतर बनाने के लिए की जाने वाली पहल के बारे में बताते हुए महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय म्यूजियम की ट्रस्टी, श्रीमती रमा दत्त ने कहा कि सर्वोत्तम प्रणालियों को साझा करना शिक्षकों के विकास में सहायक है। सप्ताह में दो बार समूह शिक्षक बैठकें आयोजित की जा सकती हैं, जिसमें ना केवल समान स्तर के शिक्षक बल्कि सीनियर शिक्षक भी अपने जूनियर्स का मार्गदर्शन कर सकते हैं।द पैलेस स्कूल की प्रिंसिपल, उर्वशी वारमेन ने कहा कि शिक्षक के विकास में स्कूल एक मोटीवेटिंग फैक्टर होना चाहिए। पैरेंटस् एवं शिक्षकों के मध्य सम्पर्क बनाने के लिए टीम बिल्डिंग एक्टिविटीज महत्वपूर्ण हैं।

इस पैनल डिस्कशन में स्कोलास्टिक इंटरनेशनल की सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (एजुकेशन), डॉ. दुरिया अजीज; आईबीओ के डवलपमेंट एंड रिकग्निशन मैनेजर, महेश बालकृष्णन (चेयर); पूणे से सुश्री पूजा जैन के अतिरिक्त लेखक एवं संपादक, विनीता रामचंदानी भी उपस्थित थे। दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेेन्स का समापन कल ‘बिल्डिंग अ स्टोरी एंड सपोर्ट ब्रिज बिट्वीन अर्ली ईयर्स‘; ‘फोक डान्स एंड फिटनेस’, ‘प्ले विद अ पर्पस’, आदि विषयों पर आयोजित पैनल डिस्कशंस के साथ होगा।

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