दीर्घकालीन विकास के लिए उत्पादक्ता के साथ प्रकृति का संतुलन जरूरी

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-राष्ट्रीय उत्पादक्ता सप्ताह-2019
जयपुर। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की ओर से पूरे देश मेेंं 12 से 18 फरवरी तक उत्पादकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंगलवार को हरिशचन्द माथुर राज्य लोक प्रशासन संस्थान में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, राजस्थान राज्य उत्पादकता परिषद तथा राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह का शुभारम्भ किया गया। राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह के अन्तर्गत 18 फरवरी तक ’’उत्पादकता और स्थिरता के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था’’ थीम पर राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और व्यवसायों के समन्वय में विशेषज्ञों द्वारा पैनल चर्चा, सेमिनार तथा कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

समारोह के मुख्य अतिथि आयुक्त, उद्योग कृष्ण कांत पाठक ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दीर्घकालीन विकास के लिए आवश्यक है कि उत्पादकता और प्रकृति का संतुलन साथ-साथ चले। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उन्हें आने वाली पीढ़ी के लिए बचाए रखना जरूरी है। यह तभी संभव है जब हम उत्पादों के उपयोग को कम करें, उन्हें दोबारा उपयोग करें और रीसायकल करें। उन्होंने कहा कि यूज एण्ड थ्रो की संस्कृति हमारी परंपरा नहीं रही है।

हरिशचन्द माथुर राज्य लोक प्रशासन संस्थान की अतिरिक्त महानिदेशक शैली किशनानी ने कहा कि विकास को रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह प्रयास किया जाना चाहिये कि प्रकृति को इसकी कीमत नहीं चुकानी पड़े। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और हमें उन्हें बचाना होगा। इस अवसर पर भारत सरकार के एमएसएमई डवलपमेंट इंस्टीट्यूट के निदेशक एम के श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के हितों की सुरक्षा के लिए पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के साथ संतुलन बनाए रखना आज के समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में राजस्थान राज्य उत्पादकता परिषद् के अध्यक्ष के एल जैन ने कहा कि रीसाइक्िंलग के माध्यम से आर्थिक प्रगति का इजराइल अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रीयल वेस्ट से नए उत्पाद बनाने की तकनीक को अपनाना जरूरी है। इससे पहले राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् के क्षेत्रीय निदेशक मुकेश सिंह ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

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