भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा कराया जा रहा है महाराणा प्रताप के स्मारकों पर संरक्षण एवं नवनिर्माण कार्य

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-शिक्षा राज्य मंत्री
जयपुर। शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने विधानसभा में कहा है महाराणा प्रताप के स्मारक एवं समाधि स्थल के संरक्षण, नवनिर्माण एवं हेरिटेज लुक देने का कार्य भारतीय भूसर्वेक्षण विभाग द्वारा अथवा उसकी अनुमति से केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा कराया जाता है। इसके अन्तर्गत चांडक में 83.63 लाख, गोगुन्दा में 142.85 लाख एवं दिबेर में 206.14 लाख रूपए के कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं जबकि छापली में 205.70 लाख के कार्य कराए जा रहे हैं।

डोटासरा सोमवार को सदन में प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के इस सम्बन्ध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का पर्यटन मंत्री की ओर से जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2005-06 में 675 लाख की परियोजना स्वीकृत हुई थी एवं वर्ष 2015-16 में 767.23 लाख के कार्य महाराणा प्रताप के स्मारकों के लिए स्वीकृत हुए थे।

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के स्मारक और खण्डहर महल का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से ही कराया गया है। चावण्ड में महाराणा प्रताप स्मारक एवं समाधि स्थल के संरक्षण के कार्यो के लिए दिए गए 65.73 लाख रूपए में मूर्ति के चारों ओर फ्लोरिंग, बुर्ज पर चिनाई, बाहरी कम्पाउण्ड वॉल का कार्य, पार्किंग व सीसी रोड का कार्य, नए भूतल पर कमरे व फर्श के दरवाजे, पम्प रूम्स मरम्मत, सबमर्सिबल पम्प, कंगूरे मरम्त, पाथवे निर्माण जैसे कार्य कराए गए हैं।

इससे पहले विधायक अमृतलाल मीणा के मूल प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का खण्डहर महल, चावण्ड, जिला उदयपुर एक राष्ट्रीय धरोहर स्थल के रूप में पहले से ही भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण का संरक्षित स्थल घोषित है, जिसका संरक्षण, जीर्णोद्धार का कार्य भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण द्वारा समय-समय पर करवाया जाता है। स्थल पर्यटकों हेतु सूर्य उदय से सूर्य अस्त तक खुला रहता है, जिस कारण लाइट की व्यवस्था नही की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा बजट उपलब्धता एवं प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यो के प्रस्ताव पर युक्तियुक्त निर्णय लिया जाता है।

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